मैं एक सामान्य नागरिक हूँ। एक साधारण सा जीवन जी रहा हूँ। पर मेरे विचार साधारण नहीं हैं, उसमें असाधारन विलक्षणता है। आज का युग भी विचारों का है। अब युद्ध सिर्फ तलवारों से नहीं लड़े जाते हैं, उसके पीछे विचारों का बहुत बड़ा योगदान रहता है। उदाहरण के लिए ISIS को ही ले लो....कितना प्रचार प्रसार इस आंतकी संगठन ने सोशल मीडिया के द्वारा करा था और कर रहा भी है।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स अब विचारों के आदान-प्रदान के सबसे बड़े माध्यम बन चुके है और इसी के द्वारा राजनैतिक से लेकर अन्य सभी संगठन अपने-अपने हितों को साधने में लगे रहते हैं।
एक विशेष तरह के प्रोपेगंडा को फैला कर वामपंथी से लेकर समाज विरोधी तत्व सोशल नेटवर्किंग साइट्स को लगातार एक हथियार की तरह प्रयोग करने लगे हैं। जहाँ तक सोशल मीडिया का प्रश्न है तो इसकी पहुँच अब भारत के सुदूर गावों तक हो चूका है। अब स्मार्ट फ़ोन को खरीदने में ग्रामीण लोग भी आगे निकल चुके हैं। ये अच्छा भी है, ये होना चाहिए।