आज smart phones का समय है। हर किसी के पास, यहाँ तक की मेरे ऑफिस के peon जिसकी मासिक वेतन केवल कुछ रूपये है, वो भी branded company का स्मार्ट फ़ोन रखा है। ये अच्छी बात है, हमारा देश आगे बढ़ रहा है, और यह सुचना क्रांति का युग है। लेकिन क्या हम भी स्मार्ट हैं, स्मार्ट फ़ोन्स को उपयोग करने में ? कुछ मुट्ठी भर लोगों को छोड़कर बाकीं लोगों का जबाब होगा - नहीं।

जबकि इसके उलट हम चाहें तो अपने पॉकेट में रखे स्मार्ट फ़ोन के द्वारा ही बहुत ज्ञान अर्जित कर सकते हैं। चाहे जिस भी विषय में हमारी रूचि हो, हम उसमें आगे बढ़ सकते हैं। बहुत सारे फ्री Android Apps आज-कल ऑनलाइन और ऑफलाइन उपलब्ध है। छोटे बच्चे विशेषकर सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे की शिकायत होती है की उनकी अंग्रेजी कमजोर है, वो भी English Learning Apps के द्वारा अपनी इंग्लिंश अच्छी कर सकते हैं।
मुझे याद है, जब मैं १०-१२ वर्ष का था, मेरे पास एक voice recorder एवं अलार्म घड़ी की आवश्यकता थी क्यूंकि मैं ध्यान करता था। मैं उस समय सोचता था की काश मेरे पास कोई ऐसी चीज हो जिससे मैं ध्यान के recordings कान में लगाकर, timer सेट करके ध्यान साधना करता। आज स्मार्ट फ़ोन एक सर्व सुलभ चीज बन गयी है। किन्तु जीवन की यह एक करवी सच्चाई है, की जो चीज हमारे पास होती है उसका पूरा उपयोग हम बहुत ही कम करते हैं। यही हाल कमोवेश स्मार्ट फ़ोन्स का भी होता जा रहा है।
जीवन को ही ले लीजिये ! कितने लोग हैं, जो जीवन का सदुपयोग करते हैं। समय का सदुपयोग करते हैं। यहाँ मेरा मतलब उपयोग नहीं सदुपयोग है। सदुपयोग मतलब Best Use करना। अब क्या उपयोग है और क्या सदुपयोग, यह तो परिस्थिति और बहस का विषय है। लेकिन अगर हम ईमानदारी से, अपने आप से, अपने अंदर यह विश्लेषण करें तो यह आसानी से समझ सकते हैं।
जरुरत है कि हम अवसर को पहचाने और समय, जीवन एवं खास तौर पर Gadgets को सही तरीके से उपयोग करें।
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